Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, Verse 47
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 93, verse 47 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 93 · श्लोक 47
संस्कृत श्लोक
अशनिस्वनघोषेण नगस्फोटरवेण च ।
ऐरावणनिनादेन सम्यग्ध्यानी न कम्पते ॥ ४७ ॥
हिन्दी अर्थ
जिस प्रकार तालाब में तरंगें
आती जाती रहती हैं, वैसे ही वे इस मृत्युलोक से नरक की ओर जाते हैं, तदनन्तर वहाँ से स्वर्ग की ओर
आते हैं और फिर यहीं मृत्युलोक में आते हैं, यों सैकड़ों आवर्तनों से घूमते रहते हैं