Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, Verse 49
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 93, verse 49 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 93 · श्लोक 49
संस्कृत श्लोक
नानन्दमेत्युपवने न खेदमुपगच्छति ।
न खेदमेति मरुषु नानन्दमुपगच्छति ॥ ४९ ॥
हिन्दी अर्थ
इस संसार में ज्ञानी ही सुखी है, ज्ञानी ही
जीवित है और ज्ञानी ही बलवान् है, इसलिए आप ज्ञानप्रचुर बन जाइए