Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, Verse 83
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 93, verse 83 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 93 · श्लोक 83
संस्कृत श्लोक
श्रीराम उवाच ।
सर्वसंशयनीहारशरन्मारुत हे मुने ।
सङ्गः किमुच्यते ब्रूहि समासेन मम प्रभो ॥ ८३ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामजी ने कहा : अखिल संशयरूपी कुहरे के लिए
शरत्काल के वायुरूप हे महामुने, संग किसे कहते हैं ? हे प्रभो, यह मुझसे कहिये