Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, Verse 85
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 93, verse 85 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 93 · श्लोक 85
संस्कृत श्लोक
जीवन्मुक्तशरीराणामपुनर्जन्मकारिणी ।
मुक्ता हर्षविषादाभ्यां शुद्धा भवति वासना ॥ ८५ ॥
हिन्दी अर्थ
जीवन्मुक्त स्वरूपवाले तत्त्ववेत्ताओं को पुनर्जन्म न देनेवाली हर्ष एवं विषाद
दोनों से निर्मुक्त शुद्ध वासना होती है