Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 10, Verse 34
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 10, verse 34 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 10 · श्लोक 34
संस्कृत श्लोक
दीपहस्तो यथाभ्येति तमोरूपदिदृक्षया ।
तथा विलीयते सर्वं तमस्तापैर्घृतं यथा ॥ ३४ ॥
हिन्दी अर्थ
अंधकार का स्वरूप
देखने की इच्छा से यदि कोई हाथ में दीपक लेकर आवे तो जैसे सम्पूर्णं तम नष्ट हो जाता हे अथवा ताप
से घी नष्ट हो जाता है, वैसे ही विचार से अविद्यासहित सम्पूर्ण जगत नष्ट हो जाता हे