Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 10, Verse 41
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 10, verse 41 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 10 · श्लोक 41
संस्कृत श्लोक
तन्न किंचिच्च किंचिद्वा तत्सद्ब्रह्मैव शाश्वतम् ।
तद्वस्तु तदुपादेयं यदविद्या निवर्तते ॥ ४१ ॥
हिन्दी अर्थ
वह शेषरूप ब्रह्म अविद्या के आवरणदशा में किंचित्
वस्तुस्वरूप से प्रतीत नहीं होता, उसकी नाश दशा में किंचित् वस्तुरूप से प्रतीत होता हे । वही शाश्वत
सत्-स्वरूप ब्रह्म है, वही वस्तु ओर उपादेय है, क्योकि उसीसे अविद्या निवृत्त हो जाती है