Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 100, Verse 3
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 100, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 100 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
नेहास्ति कारणं किंचिन्न च कार्यं कदाचन ।
विद्यमानमिदं सर्वं सर्वं शान्तमजं जगत् ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
हो ही नहीं सकती