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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 101, Verse 36

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 101, verse 36 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 101 · श्लोक 36

संस्कृत श्लोक

स्वर्गापवर्गवित्तादि तपोदानफलाद्यपि । प्रबुद्धमेधया साधो धिया परमबोधया ॥ ३६ ॥

हिन्दी अर्थ

चित्त के परित्याग में तप, दान, आदि सम्पूर्ण कर्म अन्तर्भूत हैँ ओर उसके फल में धन, स्वर्ग, अपवर्ग आदि सब तप आदि के फल अन्तर्भूत है, इस अभिप्राय से कहते है । हे साधो, उपदिष्ट अर्थ ग्रहण करने में अतिसमर्थ अतएव परम बोधवती अपनी बुद्धि से किया गया चित्त का परित्याग ही तप, दानादि तथा उनके फल स्वर्ग, अपवर्ग, धन आदि भी है