Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 11, Verse 105
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 11, verse 105 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 11 · श्लोक 105
संस्कृत श्लोक
सदसद्रूपमेकं तं चिदात्मानमुपागतः ।
परमप्रत्ययं पूर्णमास्पदं सर्वसंपदाम् ।। १०५
हिन्दी अर्थ
अत्यंत विश्वास के योग्य अथवा चिदेकरस, पूर्णरूप, संपूर्ण सुख-लेशों के प्रतिष्ठाभूत
और सभी प्रकार के विहारो मे स्थित उस चिदात्मरूप को मे प्राप्त हुआ हूँ