Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 11, Verse 58
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 11, verse 58 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 11 · श्लोक 58
संस्कृत श्लोक
सत्यं सर्वप्रकाराढ्यं ब्रह्मेदमिति वेद्म्यहम् ।
न मे दुःखं न कर्माणि न मे मोहो न वाञ्छितम् ॥ ५८ ॥
हिन्दी अर्थ
मुझे न दुःख है, न कर्म है, न मोह है, न कुछ अभिलाषा हे । (परब्रह्मस्वरूप में अवस्थान का
परमपुरुषार्थ रूप से वर्णन करते हे ।) में एकरूप, अपने स्वरूप मेँ स्थित, शोकशून्य तथा ब्रह्मस्वरूप
हूँ - यह सत्य हे