Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 11, Verse 97
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 11, verse 97 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 11 · श्लोक 97
संस्कृत श्लोक
अदूरमपि दूरस्थं चिदात्मानमुपास्महे ।
माधुर्यादिषु माधुर्यं तीक्ष्णादिषु च तीक्ष्णताम् ।।९७
हिन्दी अर्थ
मिश्री आदि समस्त मधुर पदार्थो में माधुर्यरूपता को, मिर्च आदि तीखे पदार्थो में तीक्ष्णरूपता को
प्राप्त हुए चिदाकार आत्मा की हम उपासना करते हैं