Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 111, Verse 36
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 111, verse 36 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 111 · श्लोक 36
संस्कृत श्लोक
एकमाद्यन्तरहितं चिन्मात्रममलान्तरम् ।
खादप्यतितरामच्छं विद्यते सर्ववेदनम् ॥ ३६ ॥
हिन्दी अर्थ
सब प्रपच यदि मिथ्या है, तो कौन-सी चीज सत्य है, इसे कहते हैं -
एक, आदि ओर अन्त से रहित, चैतन्यमात्र, सभी ओर से निर्मल, आकाश से भी अत्यन्त स्वच्छ
सर्वानुभवरूप आत्मा ही सत्य वस्तु हे