Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 121, Verse 9

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 121, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 121 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

येषु येषु यदा यद्यद्दर्शनेषु निगद्यते । सर्वमेवाङ्ग तत्सत्यं चिद्विलासो ह्यनङ्कुशः ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

ये जितनी क्रियाएँ हैं, वे सब असत्य हैं, उनमें तत्त्ववेत्ता पुरुष अपनी कर्तृत्व की कैसे भावना करेगा, ऐसी यदि किसी को आशंका हो, तो वह युक्त नहीं है, क्योकि जितनी कल्पना हैं, वे आत्मा की सत्यता से सत्य हैं, इस आशय से कहते हैं। जो-जो दर्शनशास्त्र हैं, चाहे वे वैदिक हों चाहे अवैदिक, उनमें जिस समय जिस-जिस मत का प्रतिपादन किया जाता है, हे पुत्र, वह सब सत्य ही है, क्योकि चिद्‌-विलास पर किसी तरह का अंकुश नहीं है