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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 16, Verse 2

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 16, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 16 · श्लोक 2

संस्कृत श्लोक

चुक्षोभ वायसास्थानं नीलोत्पलसरःसमम् । मत्पातमन्दवातेन भूकम्पेनेव सागरः ॥ २ ॥

हिन्दी अर्थ

जिस प्रकार भूकम्प से सागर विक्षुब्ध हो जाता है, उस प्रकार मेरे पतन से जनित मन्द पवन से कौओं की सभा, जो नील कमलों के तालाब के सदृश थी, विक्षुब्ध हो गई