Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 16, Verse 5
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 16, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 16 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
संकल्पमात्रजाताभ्यां कराभ्यां कुसुमाञ्जलिम् ।
मह्यमाशु तदैवादान्मेघो हैममिवोत्करम् ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
स्वागत वचनं के साथ ही साथ दोनों हाथों से अपने
संकल्पमात्र से उत्पादित पुष्पांजलि भरकर मेरे ऊपर उस प्रकार बरसाई, जिस प्रकार मेघ हिम की
महावृष्टि करता हो