Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 18, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 18, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 18 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
कपालमालाभरणाः पीतरक्तवसासवाः ।
आन्त्रस्रग्दामवलिता बन्धवो यस्य मातरः ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
जिसने कपाल-मालाएँ धारण की है, रक्त ओर चर्वी का आसव (मद्य) पान किया है,
एवं जो आँतरूपी मालासूत्र से वेष्टित है, एेसा वक्ष्यमाण मातृकागण उनका नृत्यादि में सदा सहायक
बन्धुवर्गं हे