Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 18, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 18, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 18 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
वसन्तगिरिकूटेषु व्योम्नि लोकान्तरेषु च ।
अवटेषु श्मशानेषु शरीरेषु च देहिनाम् ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
ये मातृकाएँ पहाड़ों की चोटियों पर, आकाश में, अन्य
लोकों में, गर्तों में भी प्राणियों के शरीरों में निवास करती हैं