Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 19, Verse 22
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 19, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 19 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
आलिङ्गितास्ततः पित्रा पूजितालम्बुसा वयम् ।
तया दृष्टाः प्रसादेन संस्थितास्तत्र संयताः ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
वहाँ पिताजी ने हम लोगों का आलिंगन किया ओर तदनन्तर हम सबने
भगवती अलम्बुसा की पूजा की । प्रसन्नतापूर्वक उस देवी के द्वारा देखे गये हम लोग विनय आदि
सद्गुणो से नियन्त्रित होकर वहाँ रहने लगे