Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 2, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 2, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 2 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
अथ तस्मिन्नवसरे ह्यस्तनाः सर्व एव ते ।
श्रोतारः समुपाजग्मुर्नभश्चरमहीचराः ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
अनन्तर
उसी समय पहले दिन के जो आकाशचर, भूचर आदि श्रोता थे, वे सब-के-सब आ धमके