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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 20, Verse 2

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 20, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 20 · श्लोक 2

संस्कृत श्लोक

तदेतद्वृत्तमभ्यासाद्वर्तमानेन वर्णितम् । मया मुनीन्द्र बोधाय प्राग्जन्मसाम्यदर्शिना ॥ २ ॥

हिन्दी अर्थ

इसलिए हे मुनीन्द्र, यद्यपि यह वृत्तान्त भूतकालीन है, तथापि “जगत भ्रान्तिमात्र है” यों अभ्यास होने के कारण पूर्वजन्म की समता देखनेवाले मैंने बोध के लिए उसका, वर्तमान जगत के साथ एकता मानकर ही, वर्णन किया हे