Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 20, Verse 29
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 20, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 20 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
भीमास्वपि महाबुद्धे दशास्वचलबुद्धयः ।
विनिर्मलोपलाकाराः संप्राप्तासु यथाक्रमम् ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
हे महाबुद्धे, दशाक्रम के अनुसार भयंकर दशाएँ भी प्राप्त हो
जाय, तथापि स्थिर बुद्धिवाले हम, निश्चल पत्थर के सदुश, स्थिराकृति होकर अवस्थित रहते हैं