Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 21, Verse 29
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 21, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 21 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
दशवर्षसहस्राणि दशवर्षशतानि च ।
भस्मसारभरापूर्णां संस्मरामि धरामधः ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
मुझे भलीर्भोति स्मरण है कि मेरुपर्वत के नीचे यह पृथ्वी ग्यारह हजार वर्षो
तक भस्म-सार के भार से व्याप्त थी