Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 21, Verse 49
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 21, verse 49 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 21 · श्लोक 49
संस्कृत श्लोक
जन्मेन्दुभास्करादीनामिन्द्रोपेन्द्रव्यवस्थितिम् ।
हिरण्याक्षापहरणं वराहोद्धरणं क्षितेः ॥ ४९ ॥
हिन्दी अर्थ
उसके बाद चन्द्रमा और सूर्य का निर्माण हुआ | तदनन्तर इन्द्र एवं उपेन्द्र की व्यवस्था हुई । बाद में
हिरण्याक्ष ने पृथ्वी का अपहरण किया । बाद में उसका वराहरूपधारी भगवान ने उद्धार किया