Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 22, Verse 17
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 22, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 22 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
त्रिंशत्त्रिपुरविक्षोभान्द्वौ दक्षाध्वरसंक्षयौ ।
दशशक्रविघातांश्च चन्द्रमौलेः स्मराम्यहम् ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
महाराज, चन्द्रमौलि महादेवजी ने कल्पो में तीस बार त्रिपुरो का विनाश किया, दो बार यानी प्रत्येक
कल्प में स्वायंभुव ओर चाक्षुष मन्वन्तर में दक्षप्रजापति के यज्ञो का विध्वंस किया तथा अपराधी दस
इन्द्रो को दण्ड दिया (उनके पदों से उन्हें च्युतकर पर्वत की गुफाओं में बन्दी बनाया अथवा वजसहित
उनके हाथों का स्तम्भन किया )- इसका मुझे स्मरण है