Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 22, Verse 49
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 22, verse 49 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 22 · श्लोक 49
संस्कृत श्लोक
स्त्रीत्वं च शतशो यातान्पुंसश्चैव स्मराम्यहम् ।
कलौ कृतयुगाचारान्कृते कलियुगस्थितिम् ॥ ४९ ॥
हिन्दी अर्थ
मुनि महाराज, किसी कल्प
में कलियुग में सत्ययुग के आचार, सत्ययुग में कलियुग की अवस्था तथा त्रेता और द्वापर में सत्ययुग के
आचार ओर कलियुग स्थिति हो जाती है-इसका मुझे स्मरण है