Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 23, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 23, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 23 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
यन्त्रं तिलानां कठिनं राशिमुग्रमिवाकुलम् ।
यं पीडयति नानङ्गस्तं मृत्युर्न जिघांसति ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
महाराज, तिलो की बड़ी राशि को व्यग्र कर देनेवाले कठिन कोल्हू यन्त्र की नाई
उग्रतापूर्वक अनंग (कामदेव) जिसे पीड़ा नहीं पहुँचाता, उसे मृत्यु मारने की इच्छा नहीं करती