Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 24, Verse 20
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 24, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 24 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
इडा च पिङ्गला चास्य देहस्य मुनिनायक ।
सुस्थिते कोमले मध्ये पार्श्वकोष्ठे निमीलिते ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
मुनिराज, इडा ओर पिंगला नाम की दो अत्यन्त
सूक्ष्म नाड़ियाँ इस देहरूपी घर के बीच दाहिने ओर वायं भाग में अवस्थित कोष्ठ में यानी कुक्षि में रहती
हं । उनका किसी से भान नहीं होता, केवल नासापुट में प्राण-संचार द्वारा अनुमान होता है