Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 24, Verse 26
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 24, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 24 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
हृत्पद्मयन्त्रत्रितये समस्ताः प्राणशक्तयः ।
ऊर्ध्वाधः प्रसृता देहे चन्द्रबिम्बादिवांशवः ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
उन प्राणो के साथ प्राण-शक्तियो का भी सब अंगों मे संवरण होता है, यह बतलाते हैं।
हे मुने, देहगत उन तीन हृदय-कमलयन्त्रो में प्राण की समस्त शक्तिर्या ऊपर ओर नीचे की ओर
उस प्रकार फैली हुई हैं, जिस प्रकार चन्द्र-विम्ब से किरण