Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 24, Verse 29
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 24, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 24 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
काचिस्पर्शमुपादत्ते काचिद्वहति नासया ।
काचिदन्नं जरयति काचिद्वक्ति वचांसि च ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
उसीकी कोई एक शक्ति स्पर्श
का ग्रहण करती हे, दूसरी कोई शक्ति नासिका द्वारा श्वास -उच्छवास का निर्वहन करती है, कोई एक
दूसरी शक्ति अन्न का परिपाक करती है, तो कोई अपर शक्ति वाक्यों का उच्चारण करती है