Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 24, Verse 31
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 24, verse 31 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 24 · श्लोक 31
संस्कृत श्लोक
तत्रोर्ध्वाधोद्विसंकेतौ प्रसृतावनिलौ मुने ।
प्राणापानाविति ख्यातौ प्रकटौ द्वौ वरानिलौ ॥ ३१ ॥
हिन्दी अर्थ
हे मुने, उसमें ऊर्ध्वगमन ओर अधोगमन यों दो प्रकार के संकेतवाले
जो दो वायु प्रसृत हैं, वे दोनों वायु प्राण एवं अपान नाम से प्रसिद्ध, श्रेष्ठ एवं प्रकट हैं