Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 25, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 25, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 25 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
या वायोस्तं विदुर्धीरा अपरं बाह्यपूरकम् ।
वहिरस्तंगते प्राणे यावन्नापान उद्गतः ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
बाहर प्राण-वायु के होने पर जब तक अपान-
वायु का उद्गम नहीं होता, तब तक एकरूप से अवस्थित पूर्ण बाह्य कुम्भक रहता है, ऐसा विद्वान लोग
कहते हैं