Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 25, Verse 39
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 25, verse 39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 25 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
आप्यायनकरीं पश्चाच्छशितामधितिष्ठति ।
प्राण एवेन्दुतां त्यक्त्वा शरीराप्यायकारिणीम् ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
एकमात्र प्राण-वायु ही शरीर
को आनन्द पहुँचानेवाली चन्द्ररूपता का परित्याग कर क्षणभर में शोषण करनेवाली सूर्यरूपता को
प्राप्त करता है