Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 25, Verse 65
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 25, verse 65 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 25 · श्लोक 65
संस्कृत श्लोक
मनसो मननं सत्यं बुद्धेरेकावबोधनम् ।
अहंकृतेरहंकारं चिदात्मानमुपास्महे ॥ ६५ ॥
हिन्दी अर्थ
महाराज, जो मन के मनन आदि व्यापार में हेतुभूत है, जो बुद्धि के बोधनव्यापार
में निमित्तभूत है एवं जो अहंकार के अहंकरण के अहंकार व्यापार में निमित्तभूत है उस चिदात्मा की
हम लोग उपासना करते हैं