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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 26, Verse 11

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 26, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 26 · श्लोक 11

संस्कृत श्लोक

प्राणापानसमायोगसमयं समनुस्मरन् । स्वयमात्मनि तुष्यामि चिरं जीवाम्यनामयः ॥ ११ ॥

हिन्दी अर्थ

भगवन्‌, प्राण ओर अपान के सन्धिस्थान में प्रकाशित हो रहे आत्मतत्त्व का निरन्तर ध्यान करता हुआ मैं अपनी आत्मा मेँ स्वयं ही सन्तुष्ट रहता हूँ । इसलिए शोकरहित होकर चिरकाल से जी रहा हू