Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 28, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 28, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 28 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
देहप्रत्ययकाले हि देहोऽयं समवस्थितः ।
असन्नेव च सत्तस्मात्प्रोक्तः सदसदात्मकः ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
उक्त अर्थ का ही स्पष्टीकरण करते हैं।
यद्यपि वास्तव में देह असत् ही है, तथापि "यह देह है", इस प्रकार देह प्रतीति के काल में अधिष्ठान-
सत्ता को लेकर ही यह शरीर सत्-सा स्थित रहता है, इसलिये यह सदसदात्मक कहा गया है