Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 28, Verse 2
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 28, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 28 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
एतां दृष्टिमवष्टभ्य स्वप्राणाभ्यासपूर्विकाम् ।
भुशुण्डवन्महाबाहो भव तीर्णमहार्णवः ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
हे
महाबाहो, अपने प्राण के निरोध या उपासनापूर्वक इस दृष्टि का अवलम्बन कर आप भुशुण्ड की नाई
विपुल महासागर से तैर जाइए