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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 28, Verse 52

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 28, verse 52 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 28 · श्लोक 52

संस्कृत श्लोक

निष्कामं शान्तिमभ्येति सम्यगालोकनान्मनः । न निन्दति न च स्तौति न हृष्यति न शोचति ॥ ५२ ॥

हिन्दी अर्थ

सम्यकृज्ञान के प्रभाव से मन सत्य ओर शीतल हो जाता है । वह न तो किसी की निन्दा करता है ओर न किसी की स्तुति वह न प्रसन्न होता है ओर न शोक ही करता हे