Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 28, Verse 67
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 28, verse 67 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 28 · श्लोक 67
संस्कृत श्लोक
सोऽन्तः शीतलतामेति दिनान्ते भुवनं यथा ।
प्रतिभासं परित्यज्य पदार्थपटलव्रजे ॥ ६७ ॥
हिन्दी अर्थ
सवनिगत सन्मात्र के दर्शन में उपाय बतलाते है ।
हे पापशून्य श्रीरामजी, विशेषाकारता का परित्याग कर पाँच भूतो के समूहात्मक घट, पट आदि
पदार्थो में सामान्यतः आभासमात्रस्वरूपता का (सन्मात्रस्वरूपता का) ही आप अवलोकन (ध्यान)
कीजिए