Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 28, Verse 69
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 28, verse 69 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 28 · श्लोक 69
संस्कृत श्लोक
ततस्तदपि संत्यज्य निराभासो भवोत्तम ।
चिदाकाशमयो नित्यं सर्वगः सर्ववर्जितः ॥ ६९ ॥
हिन्दी अर्थ
भद्र, जब आप
आभासमात्ररूपता का परित्याग कर देगे, तब चैतन्याकाशरूप, अविनाशी, परिपूर्ण, अशेष विकारों से
वर्जित तथा नितान्त निर्मलस्वरूप हो जायेंगे