Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, Verse 100
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 29, verse 100 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 100
संस्कृत श्लोक
दृशा सर्वार्तिहारिण्या चिरमस्म्यास्पदीकृतः ।
पुष्पसानूपविष्टाय तस्मै त्रैलोक्यसाक्षिणे ॥ १०० ॥
हिन्दी अर्थ
पुष्पों के शिखर पर स्थित तीनों लोकों के साक्षी
उस देवाधिदेव को मेने समीप जाकर अर्घ्य, पुष्प तथा पाद्य का समर्पण किया