Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, Verse 118
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 29, verse 118 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 118
संस्कृत श्लोक
कच्चिद्वेत्सि महाबाहो देवः कः स्यादिति द्विज ।
न देवः पुण्डरीकाक्षो न च देवस्त्रिलोचनः ॥ ११८ ॥
हिन्दी अर्थ
आगे कहे जानेवाले देवार्चन के अनुरूप अलौकिक देवस्वरूप का उपदेश देने के लिए शिष्य को
उसकी जिज्ञासा करा रहे भगवान पहले वस्िष्ठजी से प्रश्न करते है।
हे महाबाहो (५) द्विजश्रेष्ठ, क्या तुम्हें यह अवगत है कि देवता कौन है ? न तो पुण्डरीकाक्ष
ही देव है और न त्रिलोचन महादेवजी ही