Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, Verse 26
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 29, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
तथा शरीरयन्त्रेऽस्मिन्क्षते क्षीणे न तत्क्षतिः ।
दीर्घस्वप्नमये ह्यस्मिंश्चित्तसंकल्पकल्पिते ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
चित्त के
संकल्प से कल्पित तथा दीर्घकालीन स्वप्न रूप इस देह के अलंकारों से भूषित या दोषों से दूषित
हो जाने पर चैतन्यरूप आत्मा का कुछ भी नहीं बिगड़ने पाता