Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 30, Verse 41
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 30, verse 41 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 30 · श्लोक 41
संस्कृत श्लोक
चित्समस्तसुरानीकपरिवन्दितपादया ।
त्रैलोक्यचूडामणितां धत्ते वासवलीलया ॥ ४१ ॥
हिन्दी अर्थ
समस्त देवताओं की सेना से चारों ओर वन्दिति-चरणवाली इन्द्रलीला
के द्वारा चिति ही त्रैलोक्य में वन्दनीयता धारण करती है