Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 30, Verse 88
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 30, verse 88 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 30 · श्लोक 88
संस्कृत श्लोक
सर्वतः शङ्कते भीता प्राणात्ययमुपागता ।
क्षीणतोयेव शफरी विवर्तनपरायणा ॥ ८८ ॥
हिन्दी अर्थ
उस क्रम से अन्तिम अवस्था प्राप्तकर प्राण-विनाशदशा को प्राप्त हुई
यह चिति चारो ओर भयभीत होकर उस प्रकार शंकित हो जाती है, जिस प्रकार जल क्षीण होने से भूमि
में लोटपोट होने में तत्पर मछली शंकित हो जाती हे