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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 31, Verse 54

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 31, verse 54 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 31 · श्लोक 54

संस्कृत श्लोक

पुर्यष्टके चित्परमा स्वे मुने प्रतिबिम्बति । आदर्श एव प्रतिमा दृश्यते नोपलादिषु ॥ ५४ ॥

हिन्दी अर्थ

है मुने यह परम चैतन्य अपने (&) पुर्यष्टक में प्रतिबिम्बित होता हे । ठीक ही है, स्वच्छ दर्पण में ही प्रतिमा दिखलाई पड़ती है न कि मलिन पत्थर आदि में