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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 32, Verse 28

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 32, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 32 · श्लोक 28

संस्कृत श्लोक

इति वैकल्यमायातैः कारणौघैः समन्ततः । पुर्यष्टके शमं याते देहः पतति निश्चलः ॥ २८ ॥

हिन्दी अर्थ

वही जीव का देहत्याग है, यह कहते है। हे महर्षे, इस प्रकार चारों ओर से कारण-समूहों के विलीन हो जाने के कारण पुर्यष्टक के शान्त हो जाने पर यह देह निश्चेष्ट होकर गिर जाती हे