Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 32, Verse 39
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 32, verse 39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 32 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
शरीरं शवतामेति मनोमारुतवर्जितम् ।
गते गृहजने दूरं गृहं संशून्यतामिव ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
जिस प्रकार घर के लोगों के घर छोडकर दूर चले जाने पर घर शून्य हो जाता है, उसी प्रकार मन एवं
प्राण से शून्य हुआ यह शरीर शवरूप हो जाता है