Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 32, Verse 50
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 32, verse 50 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 32 · श्लोक 50
संस्कृत श्लोक
जायन्ते च म्रियन्ते च शरीराणि शरीरिणाम् ।
पादपानां च पर्णानि का तत्र परिदेवना ॥ ५० ॥
हिन्दी अर्थ
जीवों के ये शरीर और वृक्षों के पत्ते उत्पनन और नष्ट हुआ ही
करते हैं (अतः) उनके विषय में शोक ही क्या है ?