Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 33, Verse 2
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 33, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 33 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
कथं च तन्महादेव रूढं पर्यायसंकुलम् ।
भवेद्दुःखोपघाताय प्रज्ञया विनिवारितम् ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
हे महादेव, दूसरा यह प्रश्न
है कि अनेक बन्धनों से ग्रस्त चिरकालिक अनुवृत्ति से रूढ हुआ वह भेद दुःख-विनाश के लिए तत्त्वज्ञान
से निवारित कैसे (5) होगा ?