Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 34, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 34, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 34 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
त्रिमार्गकलनातीतमिति ते कथितं मुने ।
तिष्ठ तस्मिन्पदे नित्यमिति देवः सनातनः ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
हे मुने, जाग्रत् आदि तीन मार्गो से, कल्पना से तथा
कल्पनासापेक्ष तुर्यत्व संख्या से अतीत पद तुमसे मेने कहा, उसी पद मेँ तुम सदा अवस्थित रहो | वह
पद ही अविनाशी पूज्य देव है, दूसरा नहीं